बिहार… यह सिर्फ़ एक राज्य नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और संघर्ष की धरती है। यहाँ की मिट्टी ने बुद्ध दिए, चाणक्य दिए, जयप्रकाश दिए। लेकिन आज जब हम चारों ओर नज़र डालते हैं, तो दिल सवाल पूछता है – क्या यही है वो बिहार जिसका सपना हमने देखा था?
वर्तमान तस्वीर: एक कड़वा सच
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शिक्षा: लाखों बच्चे आज भी टुटे-फूटे बेंचों पर बैठकर सपनों की उड़ान भरना चाहते हैं, लेकिन उनके पंख अधूरी किताबें और अनुपस्थित शिक्षक काट देते हैं।
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स्वास्थ्य: एक आम आदमी बीमार पड़ जाए, तो उसे या तो जेब खाली करनी पड़ती है या जिंदगी दांव पर लगानी पड़ती है। गाँवों के अस्पतालों में दवा नहीं, डॉक्टर नहीं।
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रोज़गार: हमारे नौजवान, जो कल बिहार का भविष्य थे, आज मज़दूर बनकर दिल्ली, पंजाब और मुंबई की सड़कों पर भटक रहे हैं। माँ-बाप का आँगन खाली हो रहा है, गाँव वीरान हो रहे हैं।
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विकास: कुछ पुल और सड़कें बनीं हैं, बिजली के खंभे खड़े हुए हैं, लेकिन सवाल है – क्या यही असली विकास है? पेट भरा? रोज़गार मिला? भविष्य सुरक्षित हुआ?
चुनाव: उम्मीदें या सिर्फ़ नारे?
हर चुनाव में वही कहानी दोहराई जाती है। मंच से नेताओं की आवाज़ गूंजती है – “हम बदल देंगे बिहार!”
लेकिन चुनाव बीतते ही, ये आवाज़ें हवा में खो जाती हैं।
जाति, धर्म और खोखले वादों के जाल में हम फँस जाते हैं और अगले पाँच साल फिर वही तकलीफ़ें झेलते हैं।
आम इंसान क्या करे?
बिहार की तक़दीर सिर्फ़ नेताओं से नहीं बदलेगी, यह बदल सकती है तो आप और हमसे।
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वोट को हथियार बनाएँ – किसी जाति या रिश्ता-नाते से नहीं, काम और ईमानदारी से वोट करें।
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नेताओं से सवाल पूछें – अस्पताल क्यों खाली हैं? युवाओं को रोज़गार क्यों नहीं? पढ़ाई क्यों अधूरी?
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युवा शक्ति को जगाएँ – बिहार का असली खज़ाना उसके नौजवान हैं। अगर नौजवान जाग गए, तो कोई ताक़त बिहार को रोक नहीं सकती।
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छोटे-छोटे कदम उठाएँ – मोहल्ले की सफ़ाई से लेकर पंचायत की बैठकों तक, बदलाव की शुरुआत खुद से करें।
जागो बिहार!
बिहार हमेशा जागरण की भूमि रहा है। अगर बुद्ध ने यहाँ ज्ञान की रोशनी फैलाई, अगर जयप्रकाश ने यहाँ से क्रांति की चिंगारी उठाई, तो आज हम क्यों सोए रहें?
बिहार बदलेगा, अगर आम इंसान बदलेगा।
बिहार उठेगा, अगर नौजवान उठेगा।
बिहार चमकेगा, अगर वोट जाति से नहीं, मुद्दों से डाले जाएँगे।
अब वक़्त आ गया है कि हम सिर्फ़ दर्शक न रहें, बल्कि अपने बिहार की किस्मत के निर्माता बनें।
